राजस्थान हाईकोर्ट ने राजस्थान यूनिवर्सिटी में अध्ययनरत दो विदेशी छात्रों की जमानत याचिकाएं खारिज करते हुए कहा है कि वीजा अवधि समाप्त होने के बाद भारत में अवैध रूप से रह रहे विदेशी नागरिकों के मामलों को हल्के में नहीं लिया जा सकता, विशेषकर तब जब उनके खिलाफ मादक पदार्थों से जुड़े गंभीर आरोप भी दर्ज हों। जस्टिस रवि चिरानिया की एकलपीठ ने तंजानिया निवासी यूडो कोम्बा और केन्या निवासी मार्गरेट काजुंग की जमानत याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए यह आदेश पारित किया। दोनों छात्र राजस्थान यूनिवर्सिटी में अध्ययनरत थे और जयपुर के मालवीय नगर क्षेत्र में रह रहे थे।
मामले के अनुसार जवाहर सर्किल थाना पुलिस ने 11 नवंबर 2025 को एफआईआर दर्ज कर दोनों आरोपियों को गिरफ्तार किया था। पुलिस ने उन्हें एक होटल से पकड़ा था, जहां से उनके कब्जे से कोकीन बरामद होने का दावा किया गया। इस संबंध में एनडीपीएस एक्ट, भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) और विदेशी अधिनियम की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया।
सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष ने दलील दी कि दोनों छात्र वैध स्टूडेंट वीजा पर भारत आए थे और राजस्थान यूनिवर्सिटी में पढ़ाई कर रहे थे। उनके वकील ने अदालत को बताया कि बरामद कोकीन की मात्रा व्यावसायिक श्रेणी में नहीं आती। पुलिस द्वारा कुल 4.26 ग्राम पदार्थ बरामद किया गया था, जिसमें शुद्ध कोकीन की मात्रा 3.94 ग्राम बताई गई। जबकि एनडीपीएस कानून के अनुसार कोकीन की व्यावसायिक मात्रा 100 ग्राम निर्धारित है। बचाव पक्ष ने यह भी कहा कि दोनों आरोपियों का कोई पूर्व आपराधिक रिकॉर्ड नहीं है।
वहीं केंद्र सरकार की ओर से अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल भारत व्यास ने जमानत का विरोध करते हुए कहा कि दोनों आरोपियों के वीजा काफी समय पहले समाप्त हो चुके थे और उन्होंने वीजा विस्तार के लिए कोई वैध प्रक्रिया नहीं अपनाई। इस कारण वे लंबे समय से भारत में अवैध रूप से रह रहे थे। अभियोजन पक्ष ने तर्क दिया कि अवैध रूप से देश में रहने के साथ-साथ उनके पास से मादक पदार्थ की बरामदगी मामले को और गंभीर बनाती है।
सुनवाई के दौरान एफआरआरओ (फॉरेन रीजनल रजिस्ट्रेशन ऑफिस), जयपुर के अधिकारी ने अदालत को बताया कि राजस्थान में 15 हजार से अधिक विदेशी नागरिक अवैध रूप से रह रहे हैं और कई मामलों में उनके अवैध गतिविधियों से जुड़े होने की जानकारी भी सामने आई है। अदालत ने इस स्थिति को गंभीर चिंता का विषय माना।
हाईकोर्ट ने अपने आदेश में एक पुराने मामले का भी उल्लेख किया, जिसमें एनडीपीएस एक्ट के एक मामले में जमानत मिलने के बाद विदेशी नागरिक न्यायालय में पेश नहीं हुआ था। अदालत ने कहा कि ऐसे मामलों में विदेशी नागरिकों के फरार होने की आशंका अधिक रहती है, इसलिए जमानत पर विचार करते समय अतिरिक्त सतर्कता बरतना आवश्यक है। मामले के सभी तथ्यों, आरोपियों की वीजा स्थिति, मादक पदार्थ बरामदगी और फरार होने की आशंका को ध्यान में रखते हुए अदालत ने दोनों विदेशी छात्रों की जमानत याचिकाएं खारिज कर दीं। अदालत ने स्पष्ट किया कि ऐसे मामलों में नरम रुख अपनाना न्यायहित में नहीं होगा।
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